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सूर्य गायत्री मंत्र

Surya Gayatri Mantra

 
अचला सप्तमी रथ सप्तमी सूर्यरथ सप्तमी आरोग्य सप्तमी सौर सप्तमी अर्क सप्तमीऔर भानुसप्तमी
 
आलेख © कॉपीराइट - साधक प्रभात (Sadhak Prabhat)

सूर्य गायत्री मंत्र

जातक की कुंडली में सूर्य ग्रह के सभी नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए सूर्य गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है। इस मंत्र के जाप से शरीर को स्वास्थ्य और शक्ति मिलती है। आंखों की रोशनी बढ़ती है और त्वचा संबंधी समस्याओं से भी छुटकारा मिलती है। मानसिक शांति मिलाती है। सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करने का सबसे अच्छा समय सूर्य ग्रहण के दौरान होता है।

सूर्य गायत्री मंत्र -

ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।।

अर्थ- मैं सूर्य देवता को नमन करता हूं। हे प्रभु, दिन के निर्माता, मुझे बुद्धि दो और मेरे मन को प्रकाशित करो।

सूर्य गायत्री मंत्र जाप विधि -

सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समय सूर्योदय के दौरान होता है। प्रतिदिन इस मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। इस मंत्र का जाप करते समय मुख की दिशा पूर्व होनी चाहिए।

सूर्यदेव * अचला सप्तमी * सूर्य षष्ठी - छठ पूजा * आदित्य हृदय स्तोत्र * सूर्य गायत्री मंत्र * सूर्य स्त्रोत इक्कीस नाम * महीने के अनुसार सूर्य की उपासना * सोलह कलाओं पर सूर्य के नाम * सूर्य के 31 नाम * द्वादश आदित्य * भानुसप्तमी * सूर्य ध्यान स्तुति एवं जप * सूर्य माहात्म्य - प्रथम अध्याय वन्ध्या स्त्री वर्णन * सूर्य माहात्म्य - दूसरा अध्याय कुष्ठ निवारण * सूर्य माहात्म्य - तीसरा अध्याय अंधे को दृष्टि मिलना * सूर्य माहात्म्य - चौथा अध्याय मनोवांछित फल मिलना * सूर्य माहात्म्य - पंचम अध्याय नारद का नग्न युवती देख मोहित होना * सूर्य माहात्म्य - षष्ठ अध्याय सूर्य माहात्म्य वर्णन * सूर्य माहात्म्य - सप्तम अध्याय सूर्य के पूर्व दिशा में उदय होने का वर्णन * सूर्य माहात्म्य - अष्टम अध्याय नारद का वर्णन * सूर्य माहात्म्य - नौवां अध्याय सूर्य माहात्म्य में कलि का वर्णन * सूर्य माहात्म्य - दसवाँ अध्याय बारह मास * सूर्य माहात्म्य - ग्यारहवाँ अध्याय व्रत विधान * सूर्य माहात्म्य - बारहवाँ अध्याय उमामहेश्वर संवाद

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सूर्य गायत्री मंत्र ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्