× SanatanShakti.in About Us Home Founder Religion Education Health Contact Us Privacy Policy
indianStates.in

सूर्य ध्यान स्तुति एवं जप

Surya Dhyan Stuti and Japa

 
अचला सप्तमी रथ सप्तमी सूर्यरथ सप्तमी आरोग्य सप्तमी सौर सप्तमी अर्क सप्तमीऔर भानुसप्तमी
 
आलेख © कॉपीराइट - साधक प्रभात (Sadhak Prabhat)

सूर्य ध्यान स्तुति एवं जप

भगवन सूर्य का प्रतिदिन ध्यान स्तुति करने से साधक को ओज, तेज, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

विधि - सूर्योपासना की शुरुआत रविवार के दिन से करना चाहिए। भगवान सूर्य का प्रत्यक्ष या उनके चित्र को लाल आसन पर स्थापित करके उसकी धूप दीप से पूजा करनी चाहिए। फिर ध्यान स्तुति का पाठ करना चाहिए ।

सूर्य ध्यान स्तुति

जपा कुसुम संकाश काश्यपेय महत्त्द्युतिम् ।
तमोऽरि सर्वपापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरम् ।।

फिर इसके बाद  सूर्य मंत्र का नियमित जप करना चाहिए । इससे स्मरण शक्ति, व्यक्तित्व, प्रभाव समृद्धि वृद्धि तथा पारिवारिक सुख प्राप्त होता है।

सूर्य जप मन्त्र

ॐ घ्रणिः सूर्य आदित्यः ।
अथवा
ऊं ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः ।

सूर्यदेव * अचला सप्तमी * सूर्य षष्ठी - छठ पूजा * आदित्य हृदय स्तोत्र * सूर्य गायत्री मंत्र * सूर्य स्त्रोत इक्कीस नाम * महीने के अनुसार सूर्य की उपासना * सोलह कलाओं पर सूर्य के नाम * सूर्य के 31 नाम * द्वादश आदित्य * भानुसप्तमी * सूर्य ध्यान स्तुति एवं जप * सूर्य माहात्म्य - प्रथम अध्याय वन्ध्या स्त्री वर्णन * सूर्य माहात्म्य - दूसरा अध्याय कुष्ठ निवारण * सूर्य माहात्म्य - तीसरा अध्याय अंधे को दृष्टि मिलना * सूर्य माहात्म्य - चौथा अध्याय मनोवांछित फल मिलना * सूर्य माहात्म्य - पंचम अध्याय नारद का नग्न युवती देख मोहित होना * सूर्य माहात्म्य - षष्ठ अध्याय सूर्य माहात्म्य वर्णन * सूर्य माहात्म्य - सप्तम अध्याय सूर्य के पूर्व दिशा में उदय होने का वर्णन * सूर्य माहात्म्य - अष्टम अध्याय नारद का वर्णन * सूर्य माहात्म्य - नौवां अध्याय सूर्य माहात्म्य में कलि का वर्णन * सूर्य माहात्म्य - दसवाँ अध्याय बारह मास * सूर्य माहात्म्य - ग्यारहवाँ अध्याय व्रत विधान * सूर्य माहात्म्य - बारहवाँ अध्याय उमामहेश्वर संवाद

www.indianstates.in

***********

सूर्य ध्यान स्तुति एवं जप Surya Dhyan Stuti and Japa